(N/A) स्व-प्रेरण वह घटना है जिसमें एक ही कुंडली में प्रवाहित धारा को बदलने के कारण उससे गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है,जिसके परिणामस्वरूप कुंडली में $emf$ प्रेरित होता है।
इस स्थिति में,$N$ फेरों वाली कुंडली से जुड़ा चुंबकीय फ्लक्स,उसमें प्रवाहित धारा $I$ के समानुपाती होता है:
$N \phi_{B} \propto I$
$N \phi_{B} = LI \quad \dots (1)$
यहाँ,समानुपातिकता स्थिरांक $L$ को कुंडली का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) कहा जाता है,जिसे स्व-प्रेरण गुणांक भी कहते हैं।
फैराडे के प्रेरण नियम के अनुसार,प्रेरित $emf$ $(\varepsilon)$ चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के ऋणात्मक मान के बराबर होता है:
$\varepsilon = -\frac{d(N \phi_{B})}{dt}$
इस समीकरण में समीकरण $(1)$ का मान रखने पर:
$\varepsilon = -\frac{d(LI)}{dt}$
चूंकि $L$ एक दी गई कुंडली के लिए स्थिर है:
$\varepsilon = -L \frac{dI}{dt} \quad \dots (2)$
इस प्रकार,स्व-प्रेरित $emf$ हमेशा कुंडली में प्रवाहित धारा में होने वाले किसी भी परिवर्तन (वृद्धि या कमी) का विरोध करता है।