शॉटकी दोष (Schottky defect) और फ्रेंकेल दोष (Frenkel defect) की व्याख्या कीजिए।

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(N/A) $(i)$ शॉटकी दोष: यह आयनिक ठोसों में एक प्रकार का रिक्ति दोष है,जिसमें जालक स्थलों (lattice sites) से समान संख्या में धनायनों और ऋणायनों की अनुपस्थिति द्वारा विद्युत उदासीनता बनी रहती है।
साधारण रिक्ति दोष की तरह,शॉटकी दोष पदार्थ के घनत्व को कम करता है। आयनिक ठोसों में ऐसे दोषों की संख्या काफी महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए,कमरे के तापमान पर $NaCl$ में प्रति $cm^{3}$ में $10^{6}$ शॉटकी जोड़े होते हैं और प्रति $cm^{3}$ में लगभग $10^{22}$ आयन होते हैं,जिसका अर्थ है कि प्रति $10^{16}$ आयनों पर एक शॉटकी दोष होता है।
उच्च समन्वय संख्या (coordination number) वाले और समान आकार के धनायन और ऋणायन वाले आयनिक यौगिक शॉटकी दोष प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण: $NaCl, KCl, CsCl$ और $AgBr$।
$(ii)$ फ्रेंकेल दोष: कम समन्वय संख्या वाले और धनायन तथा ऋणायन के आकार में बड़ा अंतर रखने वाले आयनिक यौगिक फ्रेंकेल दोष प्रदर्शित करते हैं। इस दोष में,छोटा आयन (आमतौर पर धनायन) अपने सामान्य स्थल से विस्थापित होकर अंतराकाशी स्थल (interstitial site) पर चला जाता है। यह क्रिस्टल के घनत्व को नहीं बदलता है। उदाहरण: $ZnS, AgCl, AgBr$ और $AgI$।

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