(N/A) परावर्तन: जब कोई तरंग किसी सीमा तक पहुँचती है और दूसरा माध्यम कठोर (rigid) होता है,तो तरंग वापस पहले माध्यम में लौट आती है। इस घटना को तरंग का परावर्तन कहा जाता है। आपतित तरंग और परावर्तित तरंग परावर्तन के नियमों का पालन करती हैं (आपतन कोण = परावर्तन कोण)।
अपवर्तन: जब कोई तरंग दो अलग-अलग प्रत्यास्थ माध्यमों के बीच की सीमा पर पहुँचती है,तो तरंग का एक हिस्सा परावर्तित हो जाता है और एक हिस्सा दूसरे माध्यम में संचरित हो जाता है। यदि तरंग सीमा पर तिरछी आपतित होती है,तो संचरित तरंग अपनी दिशा बदल लेती है। इस घटना को तरंग का अपवर्तन कहा जाता है। आपतित और अपवर्तित तरंगें स्नेल के अपवर्तन के नियम का पालन करती हैं: $\frac{\sin i}{\sin r} = \frac{v_1}{v_2}$,जहाँ $v_1$ और $v_2$ क्रमशः पहले और दूसरे माध्यम में तरंग की गति हैं।