(N/A) $1$. मैथुन: केंचुए उभयलिंगी होते हैं,लेकिन वे पर-निषेचन करते हैं। मैथुन के दौरान,दो केंचुए एक-दूसरे के संपर्क में विपरीत दिशाओं में आते हैं,जिससे एक केंचुए के नर जनन छिद्र दूसरे केंचुए के शुक्राणुधानी (spermathecae) छिद्रों के संपर्क में आ जाते हैं।
$2$. शुक्राणुओं का आदान-प्रदान: दोनों केंचुओं के बीच शुक्राणुओं का आदान-प्रदान होता है और वे साथी केंचुए की शुक्राणुधानी में जमा हो जाते हैं।
$3$. कोकून निर्माण: मैथुन के बाद,क्लाइटेलम की ग्रंथियां एक श्लेष्म जैसा पदार्थ स्रावित करती हैं जो क्लाइटेलम खंडों के चारों ओर एक आवरण या कोकून बनाता है। जैसे-जैसे केंचुआ आगे बढ़ता है,यह कोकून शरीर के अग्र खंडों पर खिसकता है,जिसमें मादा जनन छिद्रों से अंडे और शुक्राणुधानी से शुक्राणु एकत्र हो जाते हैं।
$4$. निषेचन: निषेचन और विकास कोकून के भीतर होता है,जिसे बाद में मिट्टी में छोड़ दिया जाता है।