(N/A) $1$. मैथुन (Mating): केंचुए उभयलिंगी (hermaphrodite) होते हैं,जिसका अर्थ है कि उनमें नर और मादा दोनों प्रजनन अंग मौजूद होते हैं। मैथुन के दौरान,दो केंचुए एक-दूसरे के संपर्क में आते हैं और शुक्राणुओं का आदान-प्रदान करते हैं। वे विपरीत दिशाओं में लेटते हैं,जिससे एक केंचुए के नर जनन छिद्र दूसरे केंचुए के शुक्राणुधानी (spermathecae) छिद्रों के पास होते हैं। शुक्राणुओं का आदान-प्रदान होता है और वे शुक्राणुधानी में जमा हो जाते हैं।
$2$. कोकून निर्माण: मैथुन के बाद,क्लाइटेलम (clitellum) की ग्रंथि कोशिकाएं एक श्लेष्म और प्रोटीनयुक्त पदार्थ का स्राव करती हैं। यह पदार्थ क्लाइटेलम के चारों ओर एक घेरा या वलय बनाता है। जैसे-जैसे केंचुआ पीछे की ओर चलता है,यह घेरा आगे की ओर खिसकता है। जब यह मादा जनन छिद्र के ऊपर से गुजरता है,तो यह अंडे एकत्र करता है,और जब यह शुक्राणुधानी के छिद्रों के ऊपर से गुजरता है,तो यह संग्रहीत शुक्राणुओं को एकत्र करता है। अंत में,यह घेरा केंचुए के अग्र भाग से बाहर निकल जाता है और इसके सिरे बंद होकर एक कोकून का निर्माण करते हैं। निषेचन और विकास इसी कोकून के भीतर होता है।