(N/A) मृदा निर्माण के कारक:
$1$. सूर्य: सूर्य की गर्मी के कारण चट्टानें दिन में फैलती हैं और रात में सिकुड़ती हैं। इस असमान फैलाव और संकुचन से चट्टानों में दरारें पड़ जाती हैं,जिससे अंततः चट्टानें छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं।
$2$. जल: जल चट्टानों की दरारों में प्रवेश करता है। सर्दियों के दौरान,यह जल जम जाता है और फैलता है,जिससे दबाव उत्पन्न होता है जो दरारों को चौड़ा कर देता है और चट्टानों को तोड़ देता है। इसके अतिरिक्त,बहता हुआ जल चट्टानी कणों को अपने साथ ले जाता है,जिससे वे आपस में टकराकर छोटे कणों में विभाजित हो जाते हैं।
$3$. पवन: तेज हवाएं रेत और चट्टानी कणों को उड़ाकर ले जाती हैं,जो बड़ी चट्टानों से रगड़ खाकर समय के साथ उनका क्षरण करती हैं और उन्हें तोड़ देती हैं।
$4$. सजीव: चट्टानों की सतह पर उगने वाले लाइकेन (Lichens) कुछ रसायन छोड़ते हैं जो चट्टान की सतह को पाउडर जैसा बना देते हैं। मॉस (Mosses) और अन्य पौधों की जड़ें दरारों में उगकर चट्टानों को और अधिक तोड़कर महीन मृदा कणों में बदल देती हैं।
$(b)$ ह्यूमस का कार्य:
ह्यूमस मृदा को अधिक सरंध्र (porous) बनाता है,जिससे जल और वायु जमीन में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं,जो जड़ों के विकास में सहायता करते हैं और मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं।