(N/A) मीटर ब्रिज व्हीटस्टोन ब्रिज के सिद्धांत पर आधारित है।
$1$. मीटर ब्रिज के एक गैप में अज्ञात प्रतिरोध $R$ और दूसरे गैप में प्रतिरोध बॉक्स से ज्ञात प्रतिरोध $S$ को जोड़ें।
$2$. जॉकी को तार $AC$ पर तब तक खिसकाएं जब तक कि गैल्वेनोमीटर बिंदु $D$ पर शून्य विक्षेप न दिखाए। इसे नल पॉइंट (null point) कहा जाता है।
$3$. मान लीजिए तार $AD$ की लंबाई $l$ है। तो तार $DC$ की लंबाई $(100 - l) \text{ cm}$ होगी।
$4$. मान लीजिए तार का प्रति इकाई लंबाई प्रतिरोध $\rho$ है। खंड $AD$ का प्रतिरोध $P = \rho l$ और खंड $DC$ का प्रतिरोध $Q = \rho(100 - l)$ होगा।
$5$. व्हीटस्टोन ब्रिज के सिद्धांत के अनुसार,संतुलित स्थिति में:
$\frac{R}{S} = \frac{P}{Q} = \frac{\rho l}{\rho(100 - l)}$
$6$. इसे सरल करने पर हमें प्राप्त होता है:
$\frac{R}{S} = \frac{l}{100 - l}$
$7$. अतः,अज्ञात प्रतिरोध $R$ का मान इस प्रकार है:
$R = S \left( \frac{l}{100 - l} \right)$
$8$. लंबाई $l$ को मापकर और $S$ का मान जानकर,$R$ की गणना की जा सकती है। त्रुटियों को कम करने के लिए,नल पॉइंट तार के केंद्र के पास ($40 \text{ cm}$ और $60 \text{ cm}$ के बीच) प्राप्त किया जाना चाहिए।