(N/A) हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह बताता है कि किसी सूक्ष्म कण की सटीक स्थिति $(\Delta x)$ और सटीक संवेग $(\Delta p)$ को एक साथ मापना असंभव है।
इस सिद्धांत के लिए गणितीय व्यंजक इस प्रकार है:
$\Delta x \cdot \Delta p \geq \frac{h}{4 \pi}$
जहाँ:
- $\Delta x$ स्थिति में अनिश्चितता है।
- $\Delta p$ संवेग में अनिश्चितता है।
- $h$ प्लांक नियतांक है।
मुख्य निहितार्थ:
$1$. यदि किसी कण की स्थिति को सटीकता से मापा जाता है $(\Delta x \rightarrow 0)$,तो उसके संवेग में अनिश्चितता अनंत हो जाती है $(\Delta p \rightarrow \infty)$।
$2$. इसके विपरीत,यदि संवेग को सटीकता से मापा जाता है $(\Delta p \rightarrow 0)$,तो उसकी स्थिति में अनिश्चितता अनंत हो जाती है $(\Delta x \rightarrow \infty)$।
$3$. यह सिद्धांत बताता है कि इलेक्ट्रॉनों जैसे सूक्ष्म कणों के लिए हम एक सटीक प्रक्षेपवक्र (trajectory) को परिभाषित नहीं कर सकते,क्योंकि एक ही समय में स्थिति और संवेग दोनों को जानना असंभव है।
$4$. निश्चित संवेग $p$ वाले इलेक्ट्रॉन के लिए,डी-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{p}$ होती है। एक निश्चित तरंगदैर्ध्य वाली तरंग पूरे स्थान में फैली होती है,जिसका अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन किसी सीमित क्षेत्र में स्थानीयकृत नहीं है,जो $\Delta x \rightarrow \infty$ के अनुरूप है।