(N/A) द्रवों में गैसों का साम्य एक बंद सोडा वाटर की बोतल द्वारा अच्छी तरह से समझाया जा सकता है,जिसमें $CO_{2}$ गैस उच्च दबाव पर होती है। द्रव में घुले हुए $CO_{2}$ के अणुओं और गैसीय अवस्था में मौजूद अणुओं के बीच एक साम्य होता है:
$CO_{2(g)} \rightleftharpoons CO_{2(aq)}$
यह प्रक्रिया हेनरी के नियम द्वारा संचालित होती है,जिसके अनुसार स्थिर तापमान पर,विलायक के एक निश्चित आयतन में घुली हुई गैस का द्रव्यमान विलायक की सतह के ऊपर गैस के आंशिक दबाव के सीधे आनुपातिक होता है:
$\text{विलेयता} \propto \text{दबाव} \text{ (स्थिर } T\text{ पर)}$
जब बोतल बंद होती है,तो $CO_{2}$ का उच्च दबाव इसकी उच्च विलेयता सुनिश्चित करता है। बोतल खोलते ही,द्रव के ऊपर का दबाव घटकर वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो जाता है। परिणामस्वरूप,साम्य बाईं ओर स्थानांतरित हो जाता है,जिससे घुली हुई $CO_{2}$ गैस के रूप में बाहर निकल जाती है जब तक कि कम आंशिक दबाव पर नया साम्य स्थापित न हो जाए। घुली हुई गैस की इसी कमी के कारण खुली छोड़ी गई सोडा वाटर 'फ्लैट' (गैस रहित) हो जाती है।