(N/A) प्रकाश-विद्युत प्रभाव को आइंस्टीन के समीकरण द्वारा समझाया जा सकता है:
$E_{\text{photon}} = W + K.E._{\text{max}}$
$h\nu = W + \frac{1}{2}m_e v^2$
जहाँ:
$h\nu$ आपतित फोटॉन की ऊर्जा है।
$W = h\nu_0$ कार्य फलन (work function) है (इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा)।
$\frac{1}{2}m_e v^2$ उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा है।
मुख्य संबंध:
$1$. फोटॉन की ऊर्जा: $E = h\nu = \frac{hc}{\lambda}$.
$2$. इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा: $K.E. = h(\nu - \nu_0)$.
$3$. फोटॉनों की संख्या: प्रकाश पुंज की तीव्रता प्रति इकाई समय में आपतित फोटॉनों की संख्या के सीधे आनुपातिक होती है। अधिक तीव्र प्रकाश पुंज में फोटॉनों की संख्या अधिक होती है,जिसके परिणामस्वरूप उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी अधिक होती है।