(N/A) $1$. इलेक्ट्रॉन का अपवाह (Drift): एक चालक में,मुक्त इलेक्ट्रॉन तापीय ऊर्जा के कारण यादृच्छिक गति करते हैं और धनात्मक आयनों से टकराते हैं। उनका औसत वेग शून्य होता है। जब एक बाहरी विद्युत क्षेत्र $E$ लगाया जाता है,तो ये इलेक्ट्रॉन $F = -eE$ बल का अनुभव करते हैं,जिससे वे विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में धीरे-धीरे अपवाहित (drift) होते हैं। इस शुद्ध धीमी गति को अपवाह कहा जाता है।
$2$. अपवाह वेग $(v_d)$: इसे बाहरी विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त औसत वेग के रूप में परिभाषित किया गया है। यदि $\tau$ औसत विश्रांति काल (relaxation time) है,तो $v_d = -\frac{eE\tau}{m}$ होता है।
$3$. विद्युत धारा $(I)$ की व्युत्पत्ति: $A$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल और $L$ लंबाई वाले एक चालक पर विचार करें। मान लीजिए $n$ मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व है। $A \Delta x$ आयतन में इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $n A \Delta x$ है। चूंकि $\Delta x = v_d \Delta t$,इसलिए $\Delta t$ समय में अनुप्रस्थ काट से गुजरने वाला कुल आवेश $\Delta Q = (n A v_d \Delta t) e$ है। विद्युत धारा $I = \frac{\Delta Q}{\Delta t} = n e A v_d$ द्वारा दी जाती है।