(N/A) $K_{sp}$: एक निश्चित तापमान पर,अल्प विलेय लवण के संतृप्त विलयन में उसके आयनों की सांद्रता के गुणनफल को विलेयता गुणनफल $(K_{sp})$ कहा जाता है।
उदाहरण: $BaSO_{4(s)} \rightleftharpoons Ba^{2+}_{(aq)} + S{O_{4}}^{2-}_{(aq)}$
$K_{sp} = [Ba^{2+}] [SO_{4}^{2-}] \quad \dots (Eq.-I)$
$Q_{sp}$: जब अल्प विलेय लवण के आयनों वाले दो विलयनों को मिलाया जाता है,तो किसी भी क्षण उन आयनों की सांद्रता के गुणनफल को आयनिक गुणनफल $(Q_{sp})$ कहा जाता है।
उदाहरण: जब $0.1 \ M \ Ba(NO_{3})_{2}$ को $0.05 \ M \ H_{2}SO_{4}$ के साथ मिलाया जाता है,तो $Ba^{2+}$ और $SO_{4}^{2-}$ की सांद्रता का गुणनफल आयनिक गुणनफल $(Q_{sp})$ होता है।
$Q_{sp}(BaSO_{4}) = [Ba^{2+}] [SO_{4}^{2-}] \quad \dots (Eq.-II)$
$K_{sp}$ और $Q_{sp}$ के बीच संबंध:
$1$. यदि $Q_{sp} = K_{sp}$,तो विलयन संतृप्त है और साम्यावस्था स्थापित है।
$2$. यदि $Q_{sp} < K_{sp}$,तो विलयन असंतृप्त है और अवक्षेपण नहीं होगा।
$3$. यदि $Q_{sp} > K_{sp}$,तो विलयन अतिसंतृप्त है और अवक्षेपण होगा।
इस प्रकार,$Q_{sp}$ और $K_{sp}$ के मानों की तुलना करके यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अवक्षेपण होगा या नहीं।