(N/A) डायज़ोनियम लवणों की रासायनिक अभिक्रियाओं को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: $(A)$ नाइट्रोजन के विस्थापन वाली अभिक्रियाएँ और $(B)$ डायज़ो समूह के प्रतिधारण वाली अभिक्रियाएँ।
$(a)$ नाइट्रोजन के विस्थापन वाली अभिक्रियाएँ:
डायज़ोनियम समूह एक बहुत अच्छा लिविंग ग्रुप है और इसे $Cl^-$,$Br^-$,$I^-$,$CN^-$ और $OH^-$ जैसे अन्य समूहों द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है। इन अभिक्रियाओं के दौरान नाइट्रोजन गैस $(N_2)$ निकलती है।
$(i)$ सैंडमेयर अभिक्रिया:
$Cl^-$,$Br^-$ और $CN^-$ जैसे न्यूक्लियोफाइल्स को डायज़ोनियम लवण के घोल को संबंधित क्यूप्रस हैलाइड ($Cu_2Cl_2$,$Cu_2Br_2$) या साइनाइड $(CuCN)$ के साथ संबंधित अम्ल ($HCl$,$HBr$) या $KCN$ की उपस्थिति में उपचारित करके बेंजीन वलय में पेश किया जा सकता है।
$(ii)$ गाटरमैन अभिक्रिया:
डायज़ोनियम लवण के घोल को कॉपर पाउडर की उपस्थिति में संबंधित हैलोजन अम्ल के साथ उपचारित करके बेंजीन वलय में क्लोरीन या ब्रोमीन को पेश किया जा सकता है। इसे गाटरमैन अभिक्रिया कहा जाता है।