फास्फोरस के ऑक्सोअम्लों के रासायनिक व्यवहार की व्याख्या कीजिए।

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फास्फोरस के ऑक्सोअम्लों का रासायनिक व्यवहार उनकी ऑक्सीकरण अवस्था,$P-H$ बंधों की उपस्थिति और $P-OH$ बंधों की संख्या द्वारा निर्धारित होता है।
$1.$ असमानुपातन (Disproportionation): $+3$ ऑक्सीकरण अवस्था वाले फास्फोरस के ऑक्सोअम्ल उच्च और निम्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में असमानुपातित होने की प्रवृत्ति रखते हैं। उदाहरण के लिए,ऑर्थोफास्फोरस अम्ल $(H_3PO_3)$ को गर्म करने पर यह ऑर्थोफास्फोरिक अम्ल $(H_3PO_4)$ और फास्फीन $(PH_3)$ देता है:
$4H_3PO_3 \rightarrow 3H_3PO_4 + PH_3$
$2.$ अपचायक गुण: $P-H$ बंध वाले अम्ल प्रबल अपचायक गुण प्रदर्शित करते हैं। हाइपोफास्फोरस अम्ल $(H_3PO_2)$ में दो $P-H$ बंध होते हैं और यह एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है,उदाहरण के लिए,$AgNO_3$ को धात्विक सिल्वर में अपचयित करता है:
$4AgNO_3 + 2H_2O + H_3PO_2 \rightarrow 4Ag + 4HNO_3 + H_3PO_4$
$3.$ क्षारकता (Basicity): $P-OH$ बंधों में ऑक्सीजन से जुड़े हाइड्रोजन परमाणु आयनित हो सकते हैं और अम्ल की क्षारकता में योगदान करते हैं। फास्फोरस से सीधे जुड़े हाइड्रोजन परमाणु ($P-H$ बंध) आयनित नहीं होते हैं। अतः,$H_3PO_4$ ट्राईबेसिक,$H_3PO_3$ डाईबेसिक और $H_3PO_2$ मोनोबेसिक होता है।

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