(A-D) आर्हेनियस अम्ल-क्षार सिद्धांत: इस सिद्धांत के अनुसार,अम्लता या क्षारीयता की प्रबलता जलीय विलयन में उनके आयनीकरण पर निर्भर करती है।
- प्रबल अम्ल: वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित हो जाते हैं। उदाहरण: परक्लोरिक अम्ल $(HClO_4)$,हाइड्रोक्लोरिक अम्ल $(HCl)$,हाइड्रोब्रोमिक अम्ल $(HBr)$,हाइड्रोआयोडिक अम्ल $(HI)$,नाइट्रिक अम्ल $(HNO_3)$ और सल्फ्यूरिक अम्ल $(H_2SO_4)$।
- प्रबल क्षार: वे क्षार जो जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित हो जाते हैं। उदाहरण: लिथियम हाइड्रॉक्साइड $(LiOH)$,सोडियम हाइड्रॉक्साइड $(NaOH)$,पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड $(KOH)$,सीज़ियम हाइड्रॉक्साइड $(CsOH)$ और बेरियम हाइड्रॉक्साइड $(Ba(OH)_2)$।
- दुर्बल अम्ल-क्षार: इनका जलीय विलयन में आंशिक आयनीकरण होता है। उदाहरण: $Mg(OH)_2$ और $Ca(OH)_2$ दुर्बल क्षार हैं; $HCN, H_2S, H_3PO_4$ दुर्बल अम्ल हैं।
$(B)$ ब्रोंस्टेड-लोरी अम्ल-क्षार सिद्धांत: एक प्रबल अम्ल अच्छा प्रोटॉन दाता होता है और एक प्रबल क्षार अच्छा प्रोटॉन ग्राही होता है।
- प्रबल अम्ल: प्रबल अम्ल आसानी से प्रोटॉन दान करते हैं। इनके संयुग्मी क्षार बहुत दुर्बल होते हैं। उदाहरण: $(HClO_4, HCl, HBr, HI, HNO_3, H_2SO_4)$ प्रबल अम्ल हैं क्योंकि ये अच्छे प्रोटॉन दाता हैं।
- संयुग्मी क्षार: इन प्रबल अम्लों के संयुग्मी क्षार जैसे $(ClO_4^-, Cl^-, Br^-, I^-, NO_3^-, HSO_4^-)$ पानी की तुलना में बहुत दुर्बल क्षार होते हैं।