द्विबीजपत्री बीज की संरचना की व्याख्या कीजिए।

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(N/A) $\rightarrow$ बीज का सबसे बाहरी आवरण बीजचोल (Seed coat) होता है।
$\rightarrow$ बीजचोल में दो परतें होती हैं, बाहरी परत को टेस्टा (Testa) और आंतरिक परत को टेगमन (Tegmen) कहते हैं।
$\rightarrow$ नाभिका (Hilum) बीजचोल पर एक निशान होता है जिसके माध्यम से विकासशील बीज फल से जुड़े होते हैं।
$\rightarrow$ नाभिका के ऊपर एक छोटा छिद्र होता है जिसे बीजांडद्वार (Micropyle) कहा जाता है।
$\rightarrow$ बीजचोल के भीतर भ्रूण होता है, जिसमें एक भ्रूणीय अक्ष और दो बीजपत्र होते हैं। बीजपत्र अक्सर मांसल और संचित खाद्य पदार्थों से भरे होते हैं।
$\rightarrow$ भ्रूणीय अक्ष के दो सिरों पर मूलांकुर (Radicle) और प्रांकुर (Plumule) उपस्थित होते हैं।
$\rightarrow$ अरंडी (Castor) जैसे कुछ बीजों में, दोहरा निषेचन के परिणामस्वरूप बना भ्रूणपोष (Endosperm) एक खाद्य भंडारण ऊतक होता है।
$\rightarrow$ सेम, चना और मटर जैसे पौधों में, परिपक्व बीजों में भ्रूणपोष मौजूद नहीं होता है और ऐसे बीजों को अभ्रूणपोषी (Non-endospermous) बीज कहा जाता है।

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