(N/A) एकक कोष्ठिका छह मापदंडों द्वारा अभिलक्षित होती है:
$1$. तीन किनारों $a, b$,और $c$ के साथ इसकी विमाएँ। ये किनारे परस्पर लंबवत हो भी सकते हैं और नहीं भी।
$2$. किनारों के बीच के कोण: $\alpha$ ($b$ और $c$ के बीच),$\beta$ ($a$ और $c$ के बीच) और $\gamma$ ($a$ और $b$ के बीच)।
एकक कोष्ठिकाएँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
$(a)$ आद्य (Primitive) एकक कोष्ठिका: जब अवयवी कण केवल एकक कोष्ठिका के कोनों पर उपस्थित होते हैं,तो इसे आद्य एकक कोष्ठिका कहा जाता है।
$(b)$ केंद्रित (Centred) एकक कोष्ठिका: जब एकक कोष्ठिका में कोनों पर उपस्थित कणों के अतिरिक्त एक या अधिक अवयवी कण कोनों के अलावा अन्य स्थितियों पर भी उपस्थित होते हैं,तो इसे केंद्रित एकक कोष्ठिका कहा जाता है। ये तीन प्रकार की होती हैं:
$(i)$ अंतःकेंद्रित (Body-Centred) एकक कोष्ठिका: ऐसी एकक कोष्ठिका में कोनों पर उपस्थित कणों के अतिरिक्त एक अवयवी कण उसके केंद्र में होता है।
$(ii)$ फलक-केंद्रित (Face-Centred) एकक कोष्ठिका: ऐसी एकक कोष्ठिका में कोनों पर उपस्थित कणों के अतिरिक्त प्रत्येक फलक के केंद्र में एक अवयवी कण होता है।
$(iii)$ अंत्य-केंद्रित (End-Centred) एकक कोष्ठिका: ऐसी एकक कोष्ठिका में कोनों पर उपस्थित कणों के अतिरिक्त किन्हीं दो विपरीत फलकों के केंद्र में एक-एक अवयवी कण होता है।