(A) आनुवंशिक पदार्थ के रूप में कार्य करने वाले अणु को निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना चाहिए:
$(i)$ प्रतिकृति (Replication) की क्षमता: बेस पेयरिंग और पूरकता के नियम के कारण,$DNA$ और $RNA$ दोनों अपनी प्रतिकृति बनाने में सक्षम हैं। प्रोटीन जैसे अन्य अणु इस मानदंड को पूरा करने में विफल रहते हैं।
$(ii)$ रासायनिक और संरचनात्मक स्थिरता: आनुवंशिक पदार्थ को जीवन के विभिन्न चरणों,आयु या शरीर क्रिया विज्ञान में परिवर्तन के साथ स्थिर रहना चाहिए। $RNA$ के प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में मौजूद $2'-OH$ समूह इसे प्रतिक्रियाशील और आसानी से विघटित होने योग्य बनाता है। $RNA$ उत्प्रेरक (catalytic) भी होता है,इसलिए यह अधिक प्रतिक्रियाशील है। $DNA$ में यूरेसिल के स्थान पर थाइमिन की उपस्थिति इसे अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करती है।
$(iii)$ विकास के लिए आवश्यक धीमे परिवर्तनों (उत्परिवर्तन) की गुंजाइश: $DNA$ और $RNA$ दोनों उत्परिवर्तित हो सकते हैं। $RNA$ अस्थिर होने के कारण तेजी से उत्परिवर्तित होता है,जो कम जीवनकाल वाले वायरस के लिए फायदेमंद है।
$(iv)$ मेंडेलियन लक्षणों के रूप में अभिव्यक्ति: $RNA$ सीधे प्रोटीन संश्लेषण के लिए कोड कर सकता है,जबकि $DNA$ प्रोटीन संश्लेषण के लिए $RNA$ पर निर्भर करता है। $DNA$ अधिक स्थिर होने के कारण आनुवंशिक जानकारी के भंडारण के लिए बेहतर है,जबकि $RNA$ जानकारी के संचरण के लिए अधिक उपयुक्त है। इस प्रकार,$DNA$ का विकास $RNA$ से रासायनिक संशोधनों के साथ हुआ है जो इसे अधिक स्थिर बनाते हैं।