(N/A) जब दो समान धनात्मक आवेशों को एक-दूसरे से अल्प दूरी पर रखा जाता है,तो वे एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं। विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनात्मक आवेशों से बाहर की ओर निकलती हैं।
समविभव पृष्ठ वह पृष्ठ है जहाँ विद्युत विभव सभी बिंदुओं पर समान होता है।
दो समान धनात्मक आवेशों के लिए,समविभव पृष्ठ गोलाकार नहीं होते हैं। प्रत्येक आवेश के निकट,पृष्ठ लगभग गोलाकार होते हैं,लेकिन जैसे-जैसे हम आवेशों के बीच के क्षेत्र की ओर बढ़ते हैं,पृष्ठ विकृत हो जाते हैं और आपस में मिल जाते हैं।
दोनों आवेशों के बीच के क्षेत्र में,विद्युत क्षेत्र कमजोर होता है (मध्य बिंदु पर उदासीन बिंदु होता है),जिसके कारण समविभव पृष्ठ बाहर की ओर उभर जाते हैं और अंततः बड़ी दूरियों पर दोनों आवेशों को घेरने वाला एक एकल पृष्ठ बनाते हैं।