(N/A) लंबे वृक्षों में,जल पत्तियों के रंध्रों (stomatal pores) से होने वाले वाष्पोत्सर्जन या जल की हानि द्वारा उत्पन्न वाष्पोत्सर्जन खिंचाव की मदद से ऊपर चढ़ता है। इसे जल परिवहन का संसक्ति-तनाव (cohesion-tension) मॉडल कहा जाता है।
दिन के समय,वाष्पोत्सर्जन द्वारा खोया गया जल (पत्तियों द्वारा वातावरण में) रक्षक कोशिकाओं और अन्य बाह्यत्वचीय कोशिकाओं को शिथिल (flaccid) बना देता है। वे बदले में जाइलम (xylem) से जल लेती हैं। यह तने के माध्यम से पत्तियों की सतह से लेकर जड़ों के सिरों तक जाइलम वाहिकाओं में ऋणात्मक दबाव या तनाव पैदा करता है।
परिणामस्वरूप,जाइलम में मौजूद जल तने से एक एकल स्तंभ के रूप में ऊपर खिंचा चला आता है। जल के अणुओं और जाइलम वाहिकाओं की कोशिका भित्तियों के बीच संसक्ति (cohesion) और आसंजन (adhesion) बल जल स्तंभ को टूटने से बचाते हैं।
वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक:
$1$. बाहरी कारक: हवा की गति,प्रकाश,आर्द्रता और तापमान।
$2$. पादप कारक: वितान (canopy) की संरचना,रंध्रों की संख्या और वितरण,पादपों की जल स्थिति और खुले रंध्रों की संख्या।
पादपों के लिए उपयोगिता:
$1$. यह मिट्टी से विभिन्न पादप भागों में खनिजों के अवशोषण और परिवहन में मदद करता है।
$2$. वाष्पोत्सर्जन का पादपों पर शीतलन प्रभाव पड़ता है।
$3$. यह कोशिकाओं को स्फीत (turgid) रखकर पादप के आकार और संरचना को बनाए रखने में मदद करता है।
$4$. यह प्रकाश संश्लेषण के लिए जल प्रदान करता है।