(N/A) परागकण की संरचना:
$1$. परागकण नर युग्मकोद्भिद का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये सामान्यतः गोलाकार होते हैं और इनका व्यास लगभग $25-50 \ \mu m$ होता है।
$2$. इनमें एक स्पष्ट दो-स्तरीय भित्ति होती है। कठोर बाहरी परत को बाह्यचोल (exine) कहा जाता है,जो स्पोरोपोलिनिन से बनी होती है। यह ज्ञात सबसे प्रतिरोधी कार्बनिक पदार्थों में से एक है। यह उच्च तापमान,प्रबल अम्ल और क्षार को सहन कर सकता है। स्पोरोपोलिनिन को नष्ट करने वाला कोई भी एंजाइम अभी तक ज्ञात नहीं है।
$3$. बाह्यचोल में स्पष्ट छिद्र होते हैं जिन्हें जनन छिद्र (germ pores) कहा जाता है,जहाँ स्पोरोपोलिनिन अनुपस्थित होता है। यह पराग नलिका के निकलने में सहायक होता है।
$4$. परागकण की आंतरिक भित्ति को अंतःचोल (intine) कहा जाता है। यह सेलुलोज और पेक्टिन से बनी एक पतली और निरंतर परत है।
नर युग्मकोद्भिद का विकास:
$1$. लघुबीजाणु का केंद्रक समसूत्री विभाजन द्वारा दो असमान कोशिकाएं बनाता है: एक बड़ी कायिक कोशिका और एक छोटी जनन कोशिका।
$2$. कायिक कोशिका में खाद्य भंडार प्रचुर मात्रा में होता है और इसमें एक बड़ा,अनियमित आकार का केंद्रक होता है।
$3$. जनन कोशिका छोटी होती है और कायिक कोशिका के कोशिका द्रव्य में तैरती है। यह तर्कुरूपी (spindle-shaped) होती है और इसमें सघन कोशिका द्रव्य और एक केंद्रक होता है।
$4$. $60\%$ से अधिक आवृतबीजी पौधों में,परागकण इस $2$-कोशिकीय अवस्था में मुक्त होते हैं। अन्य पौधों में,परागकणों के मुक्त होने से पहले जनन कोशिका समसूत्री विभाजन द्वारा दो नर युग्मकों को जन्म देती है ($3$-कोशिकीय अवस्था)।