(N/A) $1$. जब परागकोश (anther) युवा होता है,तो प्रत्येक लघुबीजाणुधानी (microsporangium) के केंद्र में सघन रूप से व्यवस्थित समरूप कोशिकाओं का एक समूह होता है,जिसे बीजाणुजन ऊतक (sporogenous tissue) कहा जाता है।
$2$. जैसे-जैसे परागकोश विकसित होता है,बीजाणुजन ऊतक की कोशिकाएं अर्धसूत्री विभाजन (meiosis) से गुजरती हैं और लघुबीजाणु चतुष्क (microspore tetrads) बनाती हैं।
$3$. बीजाणुजन ऊतक की प्रत्येक कोशिका एक लघुबीजाणु चतुष्क को जन्म देने में सक्षम होती है और एक संभावित पराग मातृ कोशिका (pollen mother cell - $PMC$) के रूप में कार्य करती है।
$4$. पराग मातृ कोशिका से अर्धसूत्री विभाजन द्वारा लघुबीजाणुओं के निर्माण की प्रक्रिया को लघुबीजाणुजनन कहा जाता है।
$5$. जैसे ही लघुबीजाणु बनते हैं,वे चार कोशिकाओं के समूह में व्यवस्थित होते हैं जिसे लघुबीजाणु चतुष्क कहा जाता है।
$6$. जैसे-जैसे परागकोश परिपक्व होते हैं और निर्जलीकृत (dehydrate) होते हैं,लघुबीजाणु एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और पराग कणों (pollen grains) में विकसित हो जाते हैं।
$7$. प्रत्येक लघुबीजाणुधानी के अंदर हजारों लघुबीजाणु या पराग कण बनते हैं जो परागकोश के स्फुटन (dehiscence) के साथ मुक्त हो जाते हैं।