(N/A) कृत्रिम संकरण फसल सुधार की एक तकनीक है जिसमें परागण के लिए केवल वांछित पराग कणों का उपयोग किया जाता है।
$1$. विपुंसन (Emasculation): यदि मादा जनक द्विलिंगी पुष्प धारण करता है,तो परागकोष के स्फुटन से पहले चिमटी (forceps) का उपयोग करके पुष्प कलिका से परागकोष को हटाना आवश्यक है। इसे विपुंसन कहते हैं।
$2$. थैली लगाना (Bagging): विपुंसित पुष्पों को बटर पेपर से बनी थैली से ढका जाता है ताकि वर्तिकाग्र को अवांछित पराग कणों से दूषित होने से बचाया जा सके।
$3$. परागण: जब थैली लगे पुष्प का वर्तिकाग्र ग्रहणशील हो जाता है,तो चयनित नर जनक के परागकोष से एकत्र किए गए परिपक्व पराग कणों को वर्तिकाग्र पर छिड़का जाता है।
$4$. पुनः थैली लगाना (Rebagging): परागण के बाद,वांछित संकरण से फलों के विकास के लिए पुष्पों को फिर से थैली से ढक दिया जाता है।
यदि मादा जनक एकलिंगी पुष्प उत्पन्न करता है,तो विपुंसन की आवश्यकता नहीं होती है। मादा पुष्प कलिकाओं को उनके खुलने से पहले ही थैली से ढक दिया जाता है और जब वर्तिकाग्र ग्रहणशील हो जाता है,तब परागण किया जाता है।