(N/A) पराग-स्त्रीकेसर संकर्षण एक गतिशील प्रक्रिया है जिसमें परागकण और वर्तिकाग्र के बीच एक रासायनिक संवाद शामिल होता है।
$1$. पहचान: स्त्रीकेसर में यह पहचानने की क्षमता होती है कि परागकण संगत (सही) प्रकार का है या असंगत (गलत) प्रकार का।
$2$. स्वीकृति: यदि परागकण संगत है,तो स्त्रीकेसर उसे स्वीकार करता है और परागण के बाद की घटनाओं को बढ़ावा देता है,जैसे कि वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण,जो निषेचन की ओर ले जाता है।
$3$. अस्वीकृति: यदि परागकण असंगत है (अन्य प्रजातियों से या स्व-असंगत),तो स्त्रीकेसर परागकण के अंकुरण या पराग नलिका की वृद्धि को रोककर उसे अस्वीकार कर देता है।
$4$. रासायनिक संवाद: यह संकर्षण परागकण और वर्तिकाग्र की सतह पर मौजूद रासायनिक घटकों और प्रोटीन द्वारा मध्यस्थ होता है। ये घटक पहचान प्रक्रिया को सुगम बनाते हैं।
$5$. पराग नलिका की वृद्धि: सफल स्वीकृति पर,परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है और जनन छिद्रों में से एक के माध्यम से पराग नलिका का निर्माण करता है,और परागकण की सामग्री पराग नलिका में चली जाती है।