(N/A) सहजीविता एक ऐसी पारस्परिक क्रिया है जो दोनों संबंधित प्रजातियों को लाभ पहुँचाती है।
- लाइकेन: कवक और प्रकाश संश्लेषी शैवाल या साइनोबैक्टीरिया के बीच का सहजीवी संबंध।
- माइकोराइजा: कवक और उच्च पादपों की जड़ों के बीच का सहजीवी संबंध। कवक मिट्टी से आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं और बदले में,पादप कवक को ऊर्जा प्रदान करने वाले कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं।
- पादप-जंतु पारस्परिक क्रिया: यह सहजीविता का सबसे शानदार और विकासवादी रूप से आकर्षक उदाहरण है। पादपों को परागण और बीजों के प्रकीर्णन के लिए जंतुओं की आवश्यकता होती है।
- जंतुओं को उनकी सेवाओं के बदले पराग,मकरंद,रस,फलों और बीजों के रूप में पुरस्कार मिलता है।
- अंजीर के वृक्षों की कई प्रजातियों में,परागण करने वाली ततैया (wasp) की एक विशिष्ट प्रजाति के साथ गहरा एक-से-एक संबंध होता है।
- अंजीर की प्रजाति का परागण केवल उसकी भागीदार ततैया द्वारा ही होता है,किसी अन्य प्रजाति द्वारा नहीं।
- मादा ततैया फल का उपयोग न केवल अंडे देने के स्थान के रूप में करती है,बल्कि फल के भीतर विकसित हो रहे बीजों का उपयोग अपने लार्वा को पोषण देने के लिए भी करती है।
- ततैया अंडे देने के लिए उपयुक्त स्थान की तलाश करते समय अंजीर के पुष्पक्रम का परागण करती है।
अंजीर के वृक्ष और ततैया के बीच सहजीवी संबंध: $(a)$ अंजीर के पुष्प का ततैया द्वारा परागण $(b)$ ततैया अंजीर के फल में अंडे दे रही है।