(N/A) एक प्रारूपिक पुंकेसर दो मुख्य भागों से बना होता है: लंबा और पतला डंठल जिसे पुतंतु (filament) कहा जाता है,और अंतिम,सामान्यतः द्वि-पालित संरचना जिसे परागकोश (anther) कहा जाता है।
पुतंतु का समीपस्थ सिरा पुष्प के पुष्पासन या दल से जुड़ा होता है।
विभिन्न प्रजातियों के पुष्पों में पुंकेसरों की संख्या और लंबाई परिवर्तनशील होती है।
एक प्रारूपिक आवृतबीजी परागकोश द्वि-पालित (bilobed) होता है,जिसमें प्रत्येक पाली में दो कोष्ठ (theca) होते हैं,अर्थात यह द्वि-कोष्ठी (dithecous) होता है।
अक्सर,एक अनुदैर्ध्य खांच लंबाई में चलती है,जो कोष्ठों को अलग करती है।
परागकोश में कोनों पर स्थित चार लघुबीजाणुधानी (microsporangia) होते हैं।
ये लघुबीजाणुधानी आगे विकसित होकर परागपुट (pollen sacs) बन जाते हैं,जो परागकणों से भरे होते हैं।