(N/A) $PCl_5$ का निर्माण: $PCl_5$ में,फास्फोरस $sp^3d$ संकरित होकर पाँच $sp^3d$ संकर कक्षक बनाता है जो एक त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (trigonal bipyramidal) संरचना के पाँच कोनों की ओर निर्देशित होते हैं। ये पाँच $sp^3d$ संकर कक्षक $Cl$ परमाणुओं के एकल भरे हुए $p$-कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके पाँच $P-Cl$ सिग्मा बंध बनाते हैं।
तीन $P-Cl$ बंध एक ही तल में होते हैं और एक-दूसरे के साथ $120^{\circ}$ का कोण बनाते हैं। इन बंधों को विषुवतीय बंध कहा जाता है।
शेष दो $P-Cl$ बंध,जिनमें से एक तल के ऊपर और दूसरा तल के नीचे होता है,विषुवतीय तल के साथ $90^{\circ}$ का कोण बनाते हैं। इन बंधों को अक्षीय बंध कहा जाता है। अक्षीय बंध विषुवतीय बंधों की तुलना में थोड़े लंबे होते हैं क्योंकि अक्षीय बंध युग्म,विषुवतीय बंध युग्मों से अधिक प्रतिकर्षण बल का अनुभव करते हैं।
$SF_6$ का निर्माण: $SF_6$ में,सल्फर $sp^3d^2$ संकरित होकर छह $sp^3d^2$ संकर कक्षक बनाता है जो एक नियमित अष्टफलकीय (octahedral) संरचना के छह कोनों की ओर निर्देशित होते हैं। ये छह $sp^3d^2$ संकर कक्षक फ्लोरीन परमाणुओं के एकल भरे हुए कक्षकों के साथ अतिव्यापन करके छह $S-F$ सिग्मा बंध बनाते हैं। इस प्रकार,$SF_6$ अणु की ज्यामिति नियमित अष्टफलकीय होती है और सभी $S-F$ बंधों की लंबाई समान होती है।