(N/A) $\rightarrow$ नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं। यह अपशिष्ट एक सुविकसित उत्सर्जन तंत्र द्वारा हटाए जाते हैं।
$\rightarrow$ उत्सर्जन तंत्र में एक जोड़ी वृक्क (kidneys),मूत्रवाहिनी (ureters),अवस्कर (cloaca) और मूत्राशय (urinary bladder) शामिल होते हैं।
$\rightarrow$ वृक्क: ये गहरे लाल रंग की,सेम के बीज के आकार की सघन संरचनाएं होती हैं,जो शरीर गुहा में कशेरुक दंड के दोनों ओर पीछे की तरफ स्थित होती हैं।
$\rightarrow$ प्रत्येक वृक्क कई संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयों से बना होता है जिन्हें वृक्क नलिकाएं (uriniferous tubules) या नेफ्रॉन कहते हैं।
$\rightarrow$ नर में मूत्रवाहिनी मूत्रजनन नलिका के रूप में कार्य करती है,जो अवस्कर में खुलती है।
$\rightarrow$ मूत्राशय: मलाशय के अधर (ventral) भाग में एक पतली दीवार वाला मूत्राशय स्थित होता है,जो अवस्कर में खुलता है।
$\rightarrow$ उत्सर्जी अपशिष्ट रक्त द्वारा वृक्क तक लाए जाते हैं,जहाँ उन्हें अलग करके उत्सर्जित किया जाता है।