(N/A) संयोजी ऊतक जटिल प्राणियों के शरीर में सबसे अधिक प्रचुर और व्यापक रूप से वितरित ऊतक हैं। इन्हें संयोजी ऊतक इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये शरीर के अन्य ऊतकों/अंगों को जोड़ने और सहारा देने का विशेष कार्य करते हैं।
विशेषताएं:
$1$. इनमें कोशिकाओं की संख्या कम होती है और अंतरकोशिकीय आधारक (ground substance) अधिक मात्रा में होता है।
$2$. कोशिकाएं कोलेजन या इलास्टिन नामक संरचनात्मक प्रोटीन तंतुओं का स्राव करती हैं,जो मजबूती,लचीलापन और प्रत्यास्थता प्रदान करते हैं।
$3$. कोशिकाएं संशोधित पॉलीसैकराइड्स का भी स्राव करती हैं,जो कोशिकाओं और तंतुओं के बीच जमा होकर मैट्रिक्स के रूप में कार्य करते हैं।
संयोजी ऊतक के प्रकार:
संयोजी ऊतक को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
$(i)$ शिथिल संयोजी ऊतक (Loose connective tissue)
(ii) सघन संयोजी ऊतक (Dense connective tissue)
(iii) विशिष्ट संयोजी ऊतक (Specialised connective tissue)
$(i)$ शिथिल संयोजी ऊतक: कोशिकाएं और तंतु अर्ध-तरल आधारक पदार्थ में ढीले ढंग से व्यवस्थित होते हैं। उदाहरण:
$(a)$ एरिओलर ऊतक: त्वचा के नीचे मौजूद होता है। यह उपकला के लिए आधार प्रदान करता है।
$(b)$ वसा ऊतक (Adipose tissue): मुख्य रूप से त्वचा के नीचे स्थित होता है। इसकी कोशिकाएं वसा के भंडारण के लिए विशिष्ट होती हैं।
(ii) सघन संयोजी ऊतक: तंतु और फाइब्रोब्लास्ट सघन रूप से पैक होते हैं। इसके दो प्रकार हैं:
$(a)$ सघन नियमित: कोलेजन तंतु तंतुओं के कई समानांतर बंडलों के बीच पंक्तियों में मौजूद होते हैं (जैसे,कंडरा और स्नायु)।
$(b)$ सघन अनियमित: फाइब्रोब्लास्ट और कई तंतु (ज्यादातर कोलेजन) अलग-अलग दिशाओं में व्यवस्थित होते हैं।
(iii) विशिष्ट संयोजी ऊतक:
$(a)$ उपास्थि (Cartilage): अंतरकोशिकीय पदार्थ ठोस और लचीला होता है और दबाव का प्रतिरोध करता है। कोशिकाओं को कॉन्ड्रोसाइट्स कहा जाता है।
$(b)$ अस्थि (Bone): इसका आधारक पदार्थ कठोर और गैर-लचीला होता है,जो कैल्शियम लवणों और कोलेजन तंतुओं से समृद्ध होता है जो हड्डी को मजबूती देते हैं। कोशिकाओं को ऑस्टियोसाइट्स कहा जाता है।
$(c)$ रक्त (Blood): एक तरल संयोजी ऊतक जिसमें प्लाज्मा,लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs),श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBCs) और प्लेटलेट्स होते हैं।