(N/A) एक दुर्बल अम्ल $HX$ जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होता है। साम्यावस्था को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
$HX_{(aq)} + H_2O_{(l)} \rightleftharpoons H_3O_{(aq)}^{+} + X_{(aq)}^{-}$
प्रारंभिक सांद्रता $(M)$: $C, 0, 0$
सांद्रता में परिवर्तन: $-C\alpha, +C\alpha, +C\alpha$
साम्यावस्था पर सांद्रता: $C(1-\alpha), C\alpha, C\alpha$
जहाँ $\alpha$ आयनन की मात्रा है।
साम्यावस्था स्थिरांक का व्यंजक है:
$K = \frac{[H_3O^{+}][X^{-}]}{[HX][H_2O]}$
चूंकि तनु विलयनों में $[H_2O]$ स्थिर रहता है,इसलिए अम्ल वियोजन स्थिरांक $K_a$ को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
$K_a = K[H_2O] = \frac{[H_3O^{+}][X^{-}]}{[HX]}$
साम्यावस्था सांद्रता को प्रतिस्थापित करने पर:
$K_a = \frac{(C\alpha)(C\alpha)}{C(1-\alpha)}$
$K_a = \frac{C^2\alpha^2}{C(1-\alpha)} = \frac{C\alpha^2}{1-\alpha}$
यह दुर्बल अम्ल के आयनन स्थिरांक के लिए व्यंजक है।