(N/A) एक स्थिर $Z$-अक्ष के परितः घूमते हुए दृढ़ पिंड के लिए,$i$-वें कण का कोणीय संवेग $\vec{l}_i = \vec{r}_i \times \vec{p}_i$ द्वारा दिया जाता है।
दृढ़ पिंड का कुल कोणीय संवेग $\vec{L}$ उसके सभी कणों के कोणीय संवेग का सदिश योग है:
$\vec{L} = \sum_{i=1}^{n} \vec{l}_i = \sum_{i=1}^{n} (\vec{r}_i \times \vec{p}_i)$.
चूंकि $\vec{p}_i = m_i \vec{v}_i$ और घूर्णी गति के लिए $\vec{v}_i = \vec{\omega} \times \vec{r}_i$,इसलिए:
$\vec{L} = \sum_{i=1}^{n} [\vec{r}_i \times (m_i (\vec{\omega} \times \vec{r}_i))]$.
एक स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन के लिए,कोणीय वेग $\vec{\omega}$ सभी कणों के लिए समान रहता है और घूर्णन अक्ष की दिशा में होता है (मान लीजिए कि यह $Z$-अक्ष है,$\vec{\omega} = \omega \hat{k}$)।
$Z$-अक्ष की दिशा में कोणीय संवेग का घटक:
$L_Z = \sum_{i=1}^{n} m_i r_i^2 \omega = (\sum_{i=1}^{n} m_i r_i^2) \omega$.
चूंकि जड़त्व आघूर्ण $I = \sum_{i=1}^{n} m_i r_i^2$ है,इसलिए हमें प्राप्त होता है:
$L_Z = I \omega$.
सदिश रूप में,$\vec{L} = I \vec{\omega}$,जो रैखिक गति में $\vec{p} = m \vec{v}$ के अनुरूप है।