(N/A) $(1)$ वक्रता त्रिज्या $(R)$: उस गोलीय खोल की त्रिज्या जिसका दर्पण एक भाग है,वक्रता त्रिज्या कहलाती है।
$(2)$ वक्रता केंद्र $(C)$: उस गोलीय खोल का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है,वक्रता केंद्र कहलाता है।
$(3)$ ध्रुव $(P)$: गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह के ज्यामितीय केंद्र को ध्रुव $(P)$ कहते हैं।
$(4)$ मुख्य अक्ष: दर्पण के ध्रुव $(P)$ और वक्रता केंद्र $(C)$ से होकर गुजरने वाली काल्पनिक रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं।
$(5)$ द्वारक (एपर्चर): गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह के व्यास को उसका द्वारक कहते हैं।
$(6)$ मुख्य फोकस $(F)$: मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष पर जिस बिंदु पर अभिसरित होती हैं (अवतल दर्पण) या जिस बिंदु से अपसरित होती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण),उस बिंदु को मुख्य फोकस कहते हैं।
$(7)$ फोकल तल: मुख्य फोकस से गुजरने वाला और मुख्य अक्ष के लंबवत तल को फोकल तल कहते हैं।
$(8)$ फोकस दूरी $(f)$: दर्पण के ध्रुव $(P)$ और मुख्य फोकस $(F)$ के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं।
$(9)$ उपाक्षीय किरणें (पैराक्सियल किरणें): प्रकाश की वे किरणें जो मुख्य अक्ष के निकट होती हैं और उसके साथ छोटा कोण बनाती हैं,उन्हें उपाक्षीय किरणें कहते हैं।