(A) साबुन लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक एसिड के $Na^+$ या $K^+$ लवण होते हैं।
डिटर्जेंट लंबी श्रृंखला वाले हाइड्रोकार्बन के अमोनियम या सल्फोनेट लवण होते हैं।
साबुन की सफाई प्रक्रिया: साबुन के अणु के दो भाग होते हैं: एक जलरागी (पानी से प्यार करने वाला) आयनिक सिरा और दूसरा जलविरागी (पानी से दूर रहने वाला) हाइड्रोकार्बन पूंछ। पूंछ तैलीय गंदगी से जुड़ जाती है,जबकि सिरा पानी में रहता है। यह एक संरचना बनाता है जिसे $micelle$ (मिसेल) कहते हैं। जब पानी से धोया जाता है,तो $micelle$ गंदगी को अपने साथ बहा ले जाता है।
साबुन कठोर जल में झाग नहीं बनाते हैं क्योंकि वे कठोर जल में मौजूद $Ca^{2+}$ और $Mg^{2+}$ आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके एक अघुलनशील अवक्षेप बनाते हैं,जिसे $scum$ (मैला) कहा जाता है।
डिटर्जेंट के उपयोग से होने वाली समस्याएं:
$1$. अधिकांश डिटर्जेंट जैव-अनिम्नीकरणीय (non-biodegradable) होते हैं,जिससे जल और मृदा प्रदूषण होता है।
$2$. ये कुछ व्यक्तियों में त्वचा संबंधी समस्याएं या एलर्जी पैदा कर सकते हैं।