(N/A) अभिसारी दर्पण एक अवतल दर्पण होता है। इसकी फोकस दूरी $f = 20 \, cm$ है।
प्रारंभ में,वस्तु $25 \, cm$ पर है,जो वक्रता केंद्र $(C = 40 \, cm)$ और फोकस $(F = 20 \, cm)$ के बीच स्थित है। इस स्थिति में,प्रतिबिंब वास्तविक,उल्टा और आवर्धित बनता है,जो वक्रता केंद्र के पीछे स्थित होता है।
जैसे-जैसे वस्तु को $25 \, cm$ से $20 \, cm$ (फोकस) की ओर लाया जाता है,प्रतिबिंब दर्पण से दूर खिसकता जाता है और उसका आकार बढ़ता जाता है।
जब वस्तु फोकस पर होती है,तो प्रतिबिंब अनंत पर बनता है।
जब वस्तु को $20 \, cm$ से $15 \, cm$ पर लाया जाता है,तो वह अब फोकस और ध्रुव के बीच स्थित होती है।
इस नई स्थिति में,प्रतिबिंब आभासी,सीधा और आवर्धित हो जाता है,और यह दर्पण के पीछे बनता है।