(N/A) वे दो स्थितियाँ जिनमें ऊष्मा पथ से स्वतंत्र हो जाती है,वे हैं:
$(i)$ जब आयतन स्थिर रहता है $(q_V)$
$(ii)$ जब दाब स्थिर रहता है $(q_p)$
व्याख्या:
$(i)$ स्थिर आयतन पर: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार,$\Delta U = q + W$। चूँकि $W = -P_{ext} \Delta V$ और $\Delta V = 0$ है,इसलिए किया गया कार्य $0$ होता है। अतः,$q_V = \Delta U$। चूँकि आंतरिक ऊर्जा $(\Delta U)$ एक अवस्था फलन है,इसलिए $q_V$ भी एक अवस्था फलन है।
$(ii)$ स्थिर दाब पर: अवशोषित ऊष्मा $q_p = \Delta U + P \Delta V$ द्वारा दी जाती है। परिभाषा के अनुसार,एन्थैल्पी में परिवर्तन $\Delta H = \Delta U + P \Delta V$ है। अतः,$q_p = \Delta H$। चूँकि एन्थैल्पी $(\Delta H)$ एक अवस्था फलन है,इसलिए $q_p$ भी एक अवस्था फलन है।