एक धनावेशित चालक

  • A

    सदैव धन विभव पर रहता है

  • B

    सदैव शून्य विभव पर रहता है

  • C

    सदैव ऋण विभव पर रहता है

  • D

    धन विभव, शून्य विभव अथवा ऋण विभव पर हो सकता हैधनावेशित चालक धन, शून्य या ऋण विभव पर हो सकता है जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि शून्य विभव को किस प्रकार परिभाषित किया गया है।

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$4$ सेमी त्रिज्या वाले गोले को $6$ सेमी त्रिज्या वाले खोखले गोले के भीतर लटकाया गया है। अन्दर वाले गोले को $3\, e.s.u.$ विभव तक आवेशित किया गया है तथा बाहर वाला गोला पृथ्वी से जुड़ा है। अन्दर वाले गोले पर आवेश.......$e.s.u.$ है

$b$ भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर $q$ आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केंद्र पर विध्यूत विभव तथा विध्यूत क्षेत्र ज्ञात कीजए।

किसी स्थान पर एक विद्युत क्षेत्र, $\overrightarrow{ E }=(25 \hat{ i }+30 \hat{ j }) NC ^{-1}$, विद्यमान है। यदि मूलबिन्दु पर विभव का मान शून्य माना जाय तो, $x=2\; m , y=2\; m$ पर विभव होगा :

  • [JEE MAIN 2015]

प्रत्येक $10\,V$ तक आवेशित पारे की $64$ बूँदों को मिलाकर एक बड़ी बूँद बनायी गयी है। बड़ी बूँद पर विभव ........$V$ होगा (प्रत्येक बूँद गोलाकार मानी जाये) 

$L$ भुजा व $O$ केन्द्र वाले एक समबाहु षट्भुज के कोनों पर $6$ बिन्दु-आवेश चित्र में दर्शाये अनुरूप रखे है। $K =\frac{1}{4 \pi \varepsilon_0} \frac{ q }{ L ^2}$ को मानकर निर्धारित करें कि कौन प्रकथन सही है/हैं

$(A)$ $O$ पर विधुत क्षेत्र $6 K$ व $O D$ दिशा में है।

$(B)$ $O$ पर विभव शून्य है।

$(C)$ लाइन $PR$ पर सब जगह विभव समान है।

$(D)$ लाइन $ST$ पर सब जगह विभव समान है।

  • [IIT 2012]