$Li^{++}$ में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा से तीसरी कक्षा में उत्तेजित करने के लिए एकवर्णी प्रकाश की एक किरण का उपयोग किया जाता है। एकवर्णी प्रकाश की तरंगदैर्घ्य $x \times 10^{-10} \; m$ पाई जाती है। $x$ का मान $\dots$ है। [दिया गया है: $hc = 1242 \; eV \cdot nm$]

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एक हाइड्रोजन-समान आयन की उसकी प्रथम उत्तेजित अवस्था में उत्तेजन ऊर्जा $40.8 \, eV$ है। आयन को उसकी मूल अवस्था (ground state) से इलेक्ट्रॉन को हटाने के लिए आवश्यक ऊर्जा ........ $eV$ है।

कथन : बोर को यह अभिधारणा (postulate) देनी पड़ी कि नाभिक के चारों ओर स्थिर कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन विकिरण उत्सर्जित नहीं करते हैं।
कारण : चिरसम्मत भौतिकी (classical physics) के अनुसार सभी गतिशील इलेक्ट्रॉन विकिरण उत्सर्जित करते हैं।

हाइड्रोजन परमाणु में,इलेक्ट्रॉन $0.528 \; \mathring{A}$ त्रिज्या की कक्षा में $2.18 \times 10^{6} \; m/s$ के वेग से नाभिक के चारों ओर घूम रहा है। इलेक्ट्रॉन का त्वरण है:

जब हाइड्रोजन परमाणु की बोहर कक्षा में इलेक्ट्रॉन $n = 2$ से $n = 1$ अवस्था में संक्रमण करता है,तो गतिज ऊर्जा $K$ और स्थितिज ऊर्जा $U$ में क्या परिवर्तन होता है?

हाइड्रोजन की मूल अवस्था (ground state) में एक कक्षीय इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण $\mu_1$ है। इस कक्षीय इलेक्ट्रॉन को हाइड्रोजन परमाणु में ऊर्जा स्थानांतरण द्वारा $3^{rd}$ उत्तेजित अवस्था में ले जाया जाता है। यदि इलेक्ट्रॉन का नया चुंबकीय आघूर्ण $\mu_2$ है,तो:

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