$(c)$ न्यूटन के गति के दूसरे नियम के अनुसार, किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगाए गए असंतुलित बल के समानुपाती होती है और यह बल की दिशा में होती है।
मान लीजिए $m$ द्रव्यमान की एक वस्तु का प्रारंभिक वेग $u$ है और बल $F$ के प्रभाव में $t$ समय बाद उसका अंतिम वेग $v$ हो जाता है।
प्रारंभिक संवेग $p_1 = mu$.
अंतिम संवेग $p_2 = mv$.
संवेग में परिवर्तन = $p_2 - p_1 = m(v - u)$.
संवेग परिवर्तन की दर = $\frac{m(v - u)}{t}$.
नियम के अनुसार, $F \propto \frac{m(v - u)}{t}$.
चूंकि त्वरण $a = \frac{v - u}{t}$ है, इसलिए हमें $F \propto ma$ प्राप्त होता है, या $F = kma$। बल की इकाई को इस प्रकार परिभाषित करने पर कि $k = 1$ हो, हमें $F = ma$ प्राप्त होता है।
$(b)$ एक न्यूटन वह बल है जो $1 \, kg$ द्रव्यमान की वस्तु में $1 \, m s^{-2}$ का त्वरण उत्पन्न करता है।
$(c)$ पहले मामले के लिए: $F_1 = m_1 \times a_1 = 0.5 \, kg \times 5 \, m s^{-2} = 2.5 \, N$.
दूसरे मामले के लिए: $F_2 = m_2 \times a_2 = 4 \, kg \times 2 \, m s^{-2} = 8 \, N$.
चूंकि $8 \, N$ > $2.5 \, N$, इसलिए $4 \, kg$ द्रव्यमान के लिए अधिक बल की आवश्यकता होगी।