(N/A) लंबे समय तक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग निम्नलिखित तरीकों से मृदा प्रदूषण का कारण बनता है:
$(i)$ यह उपयोगी मृदा सूक्ष्मजीवों,जैसे नाइट्रोजन-स्थिरीकरण करने वाले बैक्टीरिया और केंचुओं को मार देता है,जो मृदा की उर्वरता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
$(ii)$ यह प्राकृतिक मृदा संरचना को नष्ट कर देता है और मृदा के $pH$ को बदल देता है,जिससे यह बहुत अधिक अम्लीय या क्षारीय हो जाती है,जो पौधों की वृद्धि के लिए हानिकारक है।
$(iii)$ यह जहरीले रसायनों के संचय की ओर ले जाता है,जिससे खाद्य श्रृंखला में जैविक आवर्धन (biological magnification) होता है।
$(b)$ जल प्रदूषण निम्नलिखित प्रक्रियाओं के माध्यम से मृदा प्रदूषण का कारण बनता है:
$(i)$ दूषित जल से सिंचाई: जब जल निकाय औद्योगिक कचरे या सीवेज से प्रदूषित होते हैं,तो इस पानी का सिंचाई के लिए उपयोग करने से जहरीली भारी धातुएं और रसायन सीधे मिट्टी में जमा हो जाते हैं।
$(ii)$ अपवाह और निक्षालन: जल निकायों में मौजूद प्रदूषक भूजल में रिस सकते हैं या बाढ़ के दौरान भूमि पर जमा हो सकते हैं,जिससे मिट्टी दूषित हो जाती है।