(N/A) जब तीन प्रतिरोधक $R_1, R_2$ और $R_3$ श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं,तो प्रत्येक प्रतिरोधक से समान विद्युत धारा $I$ प्रवाहित होती है। प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर $V_1 = IR_1, V_2 = IR_2$ और $V_3 = IR_3$ होता है। कुल विभवांतर $V = V_1 + V_2 + V_3 = I(R_1 + R_2 + R_3)$ होता है। यदि $R_s$ तुल्य प्रतिरोध है,तो $V = IR_s$। अतः,$R_s = R_1 + R_2 + R_3$।
$(b)$ दिया गया परिपथ तीन प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम (समांतर) में दर्शाता है,जिनके मान $R_1 = 6 \Omega, R_2 = 10 \Omega$ और $R_3 = 15 \Omega$ हैं।
पार्श्वक्रम संयोजन के लिए,तुल्य प्रतिरोध $R_p$ इस प्रकार दिया जाता है:
$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3}$
$\frac{1}{R_p} = \frac{1}{6} + \frac{1}{10} + \frac{1}{15}$
$\frac{1}{R_p} = \frac{5 + 3 + 2}{30} = \frac{10}{30} = \frac{1}{3}$
अतः,$R_p = 3 \Omega$।