(N/A) हाइपरमेट्रोपिया,जिसे दूरदृष्टि दोष भी कहा जाता है,एक दृष्टि दोष है जिसमें व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकता है लेकिन पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आंख का निकट बिंदु सामान्य $25 \ cm$ से दूर हट गया होता है।
हाइपरमेट्रोपिया के कारण:
$1$. नेत्र गोलक का बहुत छोटा हो जाना।
$2$. नेत्र लेंस की फोकस दूरी का बहुत अधिक हो जाना।
सुधार: इस दोष को उपयुक्त फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस का उपयोग करके सुधारा जाता है,जो प्रकाश की किरणों को आंख में प्रवेश करने से पहले अभिसरित (converge) करता है,जिससे प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।
$(b)$ कोलाइडल विलयन में प्रकाश के प्रकीर्णन (टिंडल प्रभाव) का अवलोकन करने के लिए प्रयोगात्मक व्यवस्था में प्रकाश की एक शक्तिशाली किरण को कोलाइडल विलयन (जैसे,सोडियम थायोसल्फेट का विलयन) से गुजारा जाता है। इस गतिविधि में उपयोग किए जाने वाले दो रसायन हैं:
$1$. सोडियम थायोसल्फेट $(Na_2S_2O_3)$
$2$. सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड $(H_2SO_4)$