(A) $(i)$ दूर दृष्टि के लिए फोकस दूरी: $f = \frac{1}{P} = \frac{1}{-6} = -0.1667\, m = -16.67\, cm$.
$(ii)$ निकट दृष्टि के लिए फोकस दूरी: $f = \frac{1}{P} = \frac{1}{2} = +0.5\, m = +50\, cm$.
$(b)$ $(i)$ वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे टिमटिमाते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में विभिन्न घनत्व और तापमान की परतें होती हैं,जिससे अपवर्तनांक लगातार बदलता रहता है। दूर के तारों (बिंदु स्रोत) से आने वाला प्रकाश लगातार अपवर्तित होता है,जिससे तारे की आभासी स्थिति और तीव्रता बदलती रहती है,जिसे हम टिमटिमाना कहते हैं।
$(ii)$ ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के बहुत करीब हैं और बिंदु स्रोतों के बजाय प्रकाश के विस्तृत स्रोतों के रूप में दिखाई देते हैं। एक ग्रह को बड़ी संख्या में बिंदु-आकार के स्रोतों के संग्रह के रूप में माना जा सकता है। इन सभी बिंदु-आकार के स्रोतों से हमारी आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की कुल मात्रा में परिवर्तन का औसत शून्य हो जाता है,जिसके परिणामस्वरूप प्रकाश स्थिर रहता है,इसलिए वे नहीं टिमटिमाते हैं।
$(iii)$ वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे ऊँचे दिखाई देते हैं। जब तारे का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है,तो वह विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है,जिससे प्रत्येक परत पर वह अभिलंब की ओर मुड़ जाता है। इस निरंतर झुकाव के कारण तारा अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊँचा दिखाई देता है।