$(D)$ लेंस की क्षमता को उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है (जब फोकस दूरी मीटर में हो)। यह लेंस की प्रकाश की किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता को दर्शाता है। इसका $SI$ मात्रक डायोप्टर $(D)$ है।
$(b)$ दिया गया है कि प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और वस्तु के आकार के बराबर है, इसलिए वस्तु को लेंस से $2f$ (फोकस दूरी का दोगुना) दूरी पर रखा जाना चाहिए, और प्रतिबिंब भी दूसरी ओर $2f$ पर बनता है।
यहाँ $v = 50\, cm$ दिया गया है, इसलिए $2f = 50\, cm$, जिसका अर्थ है कि $f = 25\, cm = 0.25\, m$।
अतः, सुई को लेंस के सामने $50\, cm$ की दूरी पर रखा गया है।
लेंस की क्षमता $P = \frac{1}{f(\text{मीटर में})} = \frac{1}{0.25} = +4\, D$ होगी।