(A) ऑर्स्टेड के प्रयोग और दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम के अनुसार,जब धारा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है,तो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं तार के चारों ओर संकेंद्रित वृत्त बनाती हैं। $(i)$ जब दिक्सूचक को तार के नीचे रखा जाता है,तो सुई का उत्तरी ध्रुव दक्षिण की ओर विक्षेपित होगा। $(ii)$ जब दिक्सूचक को तार के ऊपर रखा जाता है,तो सुई का उत्तरी ध्रुव उत्तर की ओर विक्षेपित होगा। निष्कर्ष: चुंबकीय क्षेत्र की दिशा विद्युत धारा की दिशा और तार के सापेक्ष बिंदु की स्थिति पर निर्भर करती है।
$(b)$ सीधे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र $(B)$ की शक्ति निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है: $(i)$ विद्युत धारा का परिमाण $(I)$: $B$,$I$ के सीधे समानुपाती होता है। $(ii)$ चालक से लंबवत दूरी $(r)$: $B$,$r$ के व्युत्क्रमानुपाती होता है। किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र को कम करने के लिए: $(i)$ चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का परिमाण कम करना चाहिए। $(ii)$ चालक से उस बिंदु की लंबवत दूरी बढ़ानी चाहिए।