(N/A) वायु प्रदूषण के दो मुख्य स्रोत हैं। $1990$ के आंकड़ों के अनुसार,दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित $41$ शहरों में चौथे स्थान पर थी। वाहनों की भारी आवाजाही के कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर देश में सबसे अधिक था। दिल्ली में प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए अदालत में जनहित याचिका $(PIL)$ दायर की गई। इसके बाद भारत सरकार को सार्वजनिक परिवहन के पूरे बेड़े को बदलने सहित उचित कदम उठाने का आदेश दिया गया।
किए गए प्रमुख उपाय इस प्रकार हैं:
$(i)$ सार्वजनिक परिवहन बसों में डीजल के स्थान पर $CNG$ का उपयोग; $2002$ तक सभी बसों को $CNG$ में परिवर्तित कर दिया गया था।
$(ii)$ पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना।
$(iii)$ सीसा-रहित (unleaded) पेट्रोल का उपयोग।
$(iv)$ कम सल्फर वाले डीजल/पेट्रोल का उपयोग।
$(v)$ वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तक (catalytic converters) लगाना।
$(vi)$ वाहनों के लिए $PUC$ (Pollution Under Control) प्रमाणन अनिवार्य करना।
इन नियमों का पालन करने से,एक अनुमान के अनुसार $1997$ से $2005$ के बीच दिल्ली में कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड के स्तर में काफी कमी आई है।