(N/A) सिद्धांत: वान-डी-ग्राफ जनरेटर दो स्थिर-वैद्युत सिद्धांतों पर आधारित है:
$1$. किसी खोखले चालक को दिया गया आवेश उसकी बाहरी सतह पर स्थानांतरित हो जाता है और समान रूप से फैल जाता है।
$2$. छोटे आकार के चालक का विद्युत विभव अधिक होता है।
गणितीय व्युत्पत्ति:
मान लीजिए कि $R$ त्रिज्या के एक गोलाकार कोश पर $Q$ आवेश है। सतह पर विभव $V(R) = \frac{1}{4 \pi \epsilon_{0}} \cdot \frac{Q}{R}$ है।
यदि $r$ त्रिज्या का $q$ आवेश वाला एक छोटा गोला कोश के अंदर रखा जाता है,तो छोटे गोले की सतह पर कुल विभव $V(r) = \frac{1}{4 \pi \epsilon_{0}} \left( \frac{Q}{R} + \frac{q}{r} \right)$ और बड़े कोश की सतह पर $V(R) = \frac{1}{4 \pi \epsilon_{0}} \left( \frac{Q}{R} + \frac{q}{R} \right)$ होता है।
विभवांतर $V(r) - V(R) = \frac{q}{4 \pi \epsilon_{0}} \left( \frac{1}{r} - \frac{1}{R} \right)$ प्राप्त होता है।
चूंकि $r < R$ है,इसलिए $(\frac{1}{r} - \frac{1}{R})$ धनात्मक है,जिसका अर्थ है कि आंतरिक गोला बाहरी कोश की तुलना में उच्च विभव पर है। जब उन्हें जोड़ा जाता है,तो आवेश आंतरिक गोले से बाहरी कोश में प्रवाहित होता है,जिससे बाहरी कोश पर बहुत उच्च विभव संचित किया जा सकता है।