(N/A) अभिक्रिया इस प्रकार है:
$C_6H_5OCH_3 + HI \rightarrow C_6H_5OH + CH_3I$
व्याख्या:
एनीसोल एक ईथर है जिसमें $C_6H_5-O$ और $O-CH_3$ बंध होते हैं।
$C_6H_5-O$ बंध मजबूत होता है क्योंकि ऑक्सीजन बेंजीन वलय के $sp^2$ संकरित कार्बन से जुड़ा होता है और अनुनाद के कारण $C-O$ बंध में आंशिक द्वि-बंध गुण आ जाता है।
इसलिए,$O-CH_3$ बंध कमजोर होता है और अभिक्रिया के दौरान टूट जाता है।
क्रियाविधि:
$(i)$ प्रोटोनीकरण: एनीसोल का ऑक्सीजन परमाणु $H^+$ द्वारा प्रोटोनीकृत होकर प्रोटोनीकृत ईथर बनाता है।
$C_6H_5-O(CH_3)-H^+$
(ii) नाभिकरागी प्रतिस्थापन: आयोडाइड आयन $(I^-)$ कम त्रिविम बाधा वाले मिथाइल समूह $(CH_3)$ पर आक्रमण करता है,जिससे $O-CH_3$ बंध टूटकर फिनोल $(C_6H_5OH)$ और मिथाइल आयोडाइड $(CH_3I)$ बनता है।
प्राप्त फिनोल $HI$ के साथ आगे अभिक्रिया करके $C_6H_5I$ नहीं बनाता है क्योंकि बेंजीन वलय का $sp^2$ संकरित कार्बन $I^-$ के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं देता है।