(N/A) हैलोएरीन में हैलोजनीकरण,नाइट्रीकरण,सल्फोनीकरण और फ्रीडल-क्राफ्ट अभिक्रियाएं ऑर्थो-पैरा स्थितियों पर होती हैं क्योंकि हैलोजन परमाणु $o,p-$निर्देशी समूह है। हैलोबेंजीन की अनुनाद संरचनाएं चित्र में दिखाई गई हैं।
इन संरचनाओं में,ऋण आवेश के कारण ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है। परिणामस्वरूप,इलेक्ट्रॉनरागी (electrophile) हैलोएरीन की ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर आक्रमण करता है। $-X$ समूह $o,p-$निर्देशी है।
हालांकि,हैलोएरीन इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति बेंजीन की तुलना में कम सक्रिय होते हैं। हैलोजन परमाणु $(X)$ का प्रेरणिक प्रभाव इलेक्ट्रॉन-आकर्षी $(-I)$ होता है।
इस कारण से,हैलोजन परमाणु बेंजीन वलय से इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचता है,जिससे बेंजीन की तुलना में हैलोबेंजीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है। अतः हैलोएरीन बेंजीन की तुलना में कम सक्रिय होते हैं,जिससे उनकी इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएं धीमी होती हैं और उन्हें अधिक कठोर परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।