(N/A) हेलोएरीन (जैसे क्लोरोबेंजीन) में $-NO_2$ जैसे इलेक्ट्रॉन-आकर्षक समूह की उपस्थिति ऑर्थो या पैरा स्थिति पर नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता को काफी बढ़ा देती है।
यह अभिक्रिया योग-विलोपन (addition-elimination) क्रियाविधि द्वारा होती है,जिसे अक्सर नाभिकरागी एरोमैटिक प्रतिस्थापन $(S_NAr)$ कहा जाता है।
$1$. पहले धीमे चरण में,नाभिकरागी $(OH^-)$ हैलोजन युक्त कार्बन परमाणु पर आक्रमण करता है,जिससे एक अनुनाद-स्थिर कार्बोनियन मध्यवर्ती (Meisenheimer complex) बनता है।
$2$. ऋण आवेश $-NO_2$ समूह के ऑक्सीजन परमाणुओं पर विस्थानीकृत हो जाता है,जो मध्यवर्ती को अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करता है।
$3$. दूसरे तीव्र चरण में,लीविंग ग्रुप $(Cl^-)$ बाहर निकल जाता है,जिससे वलय की एरोमैटिकता बहाल हो जाती है और अंतिम उत्पाद (नाइट्रोफिनोल) बनता है।
यह क्रियाविधि $-NO_2$ समूह द्वारा सुगम होती है,जो अनुनाद के माध्यम से संक्रमण अवस्था और मध्यवर्ती कार्बोनियन को स्थिर करता है।