(N/A) प्रकाशिक सक्रियता: जब साधारण प्रकाश को निकोल प्रिज्म से गुजारा जाता है,तो यह समतल-ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करता है। जब इस प्रकाश को पोलरीमीटर में रखे किसी यौगिक के विलयन से गुजारा जाता है,और यदि वह यौगिक प्रकाश के तल को घुमा देता है,तो उसे प्रकाशिक सक्रिय यौगिक कहा जाता है। इन्हें $(+)$ या $(-)$ के रूप में दर्शाया जाता है।
पोलरीमीटर: यह प्रकाशिक सक्रियता को मापने वाला एक उपकरण है। समतल-ध्रुवित प्रकाश के घूर्णन कोण को इसी उपकरण द्वारा मापा जाता है।
दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक $(d)$ या $(+)$ समावयवी: वह यौगिक जो समतल-ध्रुवित प्रकाश को दाईं ओर,यानी घड़ी की दिशा में घुमाता है,उसे दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक या $d$-रूप कहा जाता है। इस घूर्णन को घूर्णन कोण के मान से पहले $(+)$ चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है।